ब्रह्मलीन आचार्य सद्गुरु पं० बालकृष्ण ठाकुर दैवज्ञ, पं० गुंजन ठाकुर ‘बाबा’ एवं प्रशस्त ठाकुर
(तीन पीढ़ियों की साधना परंपरा)
आदिनाथ, आदिशक्ति, सदाशिव, सदाशिव शक्ति, ईश्वर, ईश्वरशक्ति, रुद्र, रुद्रशक्ति, विष्णु, विष्णुशक्ति, ब्रह्मा एवं ब्रह्मशक्ति स्वरूप द्वादश दिव्य गुरुओं की भक्ति के प्रति आस्थावान ब्रह्मलीन सद्गुरु पं० बालकृष्ण ठाकुर दैवज्ञ ने आध्यात्मिक आश्रम की स्थापना कर लोक में सर्वकल्याणकारी धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का संकल्प लिया। वे तंत्रयोग, मंत्रयोग एवं ज्योतिष विद्या के अनन्य साधक थे।
सद्गुरु को त्रिकालदर्शी सिद्धि प्राप्त थी। उनके सानिध्य में आने वाले श्रद्धालुओं एवं जिज्ञासुओं के भूत एवं वर्तमान का यथार्थ वर्णन कर वे उनके भविष्य को सुधारने और संवारने का सम्यक मार्गदर्शन प्रदान करते थे। उनकी दिव्य दृष्टि एवं साधना के प्रभाव से अनेक लोगों को जीवन में नई दिशा प्राप्त हुई।
अध्ययन एवं साधना का अद्भुत समन्वय
प्रचार प्रसार की भावना से दूर रहनेवाले
सद्गुरु बालकृष्ण ठाकुर दैवज्ञ अनन्य स्वाध्यायी चरित्र के थे। इसीलिए सानिध्य में आनेवाले जिज्ञासुओं की समस्या का समाधान करने के बाद अहोरात्र का अधिकाधिक समय अध्ययन मनन निदिध्यासन में लगाते थे। इसके लिए उन्होंने आश्रम में वेद, पुराण, उपनिषद्, ब्राह्मण ग्रंथ, स्मृति, दर्शन, रामायण, महाभारत, सत्साहित्य, गीता प्रेस के गीता, विविध विशेषोक कल्याण अंक सहित मिथिला के ग्रंथों का दुर्लभ संग्रह किया।
आत्मज्ञानी एवं सिद्ध महापुरुष के रूप में सद्गुरु के आशीर्वाद से अनेक असाध्य रोगियों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ। ग्रहदोषों एवं विविध आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक कष्टों से पीड़ित लोगों को भी उनके मार्गदर्शन से राहत एवं मानसिक शांति प्राप्त हुई। देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक श्रद्धालुओं ने उनके सानिध्य में जीवन की मनोकामनाओं की पूर्ति एवं सफलता प्राप्त की।
द्वितीय पीढ़ी – पं० गुंजन ठाकुर ‘बाबा’
सद्गुरु के निकटतम शिष्य एवं मातृ-पितृ भक्त सुपुत्र पं० गुंजन ठाकुर ‘बाबा’ सदैव उनके साथ छाया की भाँति रहे। उन्होंने सद्गुरु के निर्देशानुसार लोकसेवा एवं समाजसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। उन्होंने अपने एकमात्र पुत्र प्रशस्त ठाकुर को भी सद्गुरु के चरणों में समर्पित कर आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया।
सद्गुरु के ब्रह्मलीन होने के पश्चात पं० गुंजन ठाकुर ‘बाबा’ ने माताजी की सेवा करते हुए सद्गुरु के अधूरे कार्यों को पूर्ण करने का संकल्प लिया। अपने परिवार सहित उन्होंने आश्रम की सेवा एवं विस्तार में स्वयं को समर्पित कर दिया। उनके प्रयासों से आध्यात्मिक आश्रम को पुनर्संगठित कर आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन के रूप में स्थापित किया गया, ताकि इसकी आध्यात्मिक चेतना देश-विदेश तक पहुँच सके।
दैवयोगवश पं० गुंजन ठाकुर ‘बाबा’ 2026 में परलोकगमन कर गए, किन्तु उनके द्वारा स्थापित सेवा, साधना और समर्पण की परंपरा आज भी प्रेरणा प्रदान कर रही है।
तृतीय पीढ़ी – प्रशस्त ठाकुर
सद्गुरु के अनन्य साधक एवं पं० गुंजन ठाकुर के सुपुत्र प्रशस्त ठाकुर ने सद्गुरु की पूजा, अर्चना, वंदना, जप, हवन, तर्पण एवं तंत्र, मंत्र तथा ज्योतिष साधना की समृद्ध विरासत को आत्मसात किया। अपनी साधना, स्वप्रयास एवं अनुशासन के बल पर उन्होंने स्वयं को मिथिला एवं बिहार के युवा साधक वर्ग में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
प्रशस्त ठाकुर के प्रयासों से आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन का भारत सरकार स्तर पर विधिवत पंजीकरण कराया गया। उनका ध्येय धर्म, अध्यात्म, योग, तंत्र, मंत्र एवं ज्योतिष विद्या का लाभ सम्पूर्ण विश्व समुदाय तक पहुँचाना है। इसी उद्देश्य से वे विद्वानों, साधकों एवं ऊर्जावान व्यक्तित्वों को आश्रम से जोड़ रहे हैं।
वर्तमान में प्रशस्त ठाकुर जिज्ञासुओं को मंत्रदीक्षा प्रदान कर रहे हैं तथा लोककल्याण के लिए अपनी साधना शक्ति का सदुपयोग करने हेतु निरंतर समर्पित हैं। उनका संकल्प है कि आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन के माध्यम से सनातन ज्ञान, साधना और सेवा की यह दिव्य परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित एवं समृद्ध रूप में पहुँचती रहे।