ऋग्वेद में विश्व समुदाय के कल्याणार्थ कहा गया है – “सौम्य विश्वं पुष्टं ग्राम अस्मिन्नातुरम्” अर्थात सम्पूर्ण विश्व ग्राम के सभी नागरिक स्वस्थ, प्रसन्न एवं हृष्ट-पुष्ट हों। वैदिक ऋषियों ने इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु अष्टांग योग की अवधारणा प्रदान की, जो शारीरिक, मानसिक एवं भावात्मक स्वास्थ्य का सर्वोत्तम साधन है।
योग एक सर्वकालिक, सर्वदेशिक एवं सार्वभौमिक विज्ञान है, जो आज भी सम्पूर्ण विश्व समुदाय को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन प्रदान करने में उतना ही प्रभावी है जितना प्राचीन काल में था। यह परंपरा आदिशक्ति योगमाया, आदिनाथ योगीश्वर, रुद्रावतार हनुमान, योगेश्वर कृष्ण, योगी याज्ञवल्क्य, महर्षि कपिल, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि पतंजलि, घेरण्ड ऋषि एवं गोरक्षनाथ जैसे महान योगाचार्यों की साधना एवं सिद्धि से विकसित हुई है।
योग की मौलिक परंपरा
मेरी योग साधना भी उसी प्राचीन एवं मौलिक परंपरा के अनुरूप रही है, जिसका मार्गदर्शन प्रथम गुरु पिता ब्रह्मलीन
पं० शशिकान्त झा, धख्य पं० त्रिशूलधारी परमहंस तथा बालकृष्ण ठाकुर दैवत से प्राप्त हुआ।
इसी आधार पर स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग, बाल्यावस्था के सर्वांगीण विकास हेतु योग एवं नैतिक शिक्षा, किशोरियों के लिए योग, नारी शक्ति योग, युवाओं के लिए
“योगः कर्मसु कौशलम्” तथा वृद्धावस्था के लिए ऋजुयोग का विशेष प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है।
योग द्वारा स्वास्थ्य लाभ
नियमित योगाभ्यास एवं प्राणायाम के माध्यम से कब्ज, गैस्ट्रिक, दमा, साइनस, माइग्रेन, थायरॉइड, घुटना दर्द, कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, सायटिका, स्लिप्ड डिस्क, डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप जैसी अनेक समस्याओं में लाभ प्राप्त हुआ है।
साथ ही निराशा, क्रोध, तनाव, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक बाधाओं से मुक्ति पाने में भी योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है।
आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन
आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन बिहार एवं भारत का एक विशिष्ट केंद्र है, जहाँ योग की मौलिक परंपरा के अनुरूप ज्ञान एवं अभ्यास का सम्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
वर्तमान समय में जहाँ योग का स्वरूप केवल व्यायाम तक सीमित होता जा रहा है, वहीं आश्रम में योग के वास्तविक स्वरूप एवं आध्यात्मिक आधार को संरक्षित और विकसित किया जा रहा है।
आश्रम में कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, तंत्रयोग, मंत्रयोग, कुंडलिनी योग सहित हनुमान जी की योग साधना के माध्यम से निष्काम भाव, आनंद, कविशक्ति, वचन शुद्धि तथा दूरदृष्टि के विकास हेतु विशेष प्राणायाम साधना का मार्गदर्शन दिया जाता है। आश्रम का मुख्य उद्देश्य सर्वकल्याणकारी योग की प्राचीन एवं मौलिक परंपरा का पुनर्जागरण करना है।
हृदय नारायण झा
योग विशेषज्ञ
आध्यात्मिक आश्रम फाउण्डेशन, पटना